सत्य, निडरता और जनता की आवाज़ है, हस्तक्षेप: उपेन्द्र राय

हम इस समय वक्त के सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण दौर में जी रहे हैं। यह एक ऐसा दौर है जब कोरोनावायरस नाम की भयानक महामारी ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले रखा है। सीमा पर चीन की घुसपैठ के खिलाफ भारतीय फौजी पूरी वीरता और साहस के साथ लड़ रहे हैं। देश को बांटने और छिन्न-भिन्न करने की साजिशें सीमा पार से लगातार जारी हैं। देश के भीतर भी कुछ ऐसी ताकतें हैं जो राष्ट्र को अस्थिर करने की कोशिश में जुटी हुई हैं। ऐसे में बेहद जरूरी है कि पत्रकारिता के वास्तविक धर्म का निर्वहन करते हुए एक सार्थक एवं सशक्त हस्तक्षेप किया जा सके। हस्तक्षेप इसी बात की कोशिश है। 

हस्तक्षेप का कारवां अब शतक पूरा कर चुका है। सहारा समय पर रात 8 बजे प्रसारित होने वाले ‘हस्तक्षेप’ कार्यक्रम के गुरुवार को 100 एपिसोड पूरे हो गए। इन 100 एपिसोड में सहारा न्यूज़ नेटवर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं एडिटर इन चीफ उपेंद्र राय ने पत्रकारिता की नई मिसाल कायम की है। सहारा न्यूज नेटवर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं एडिटर-इन-चीफ उपेन्द्र राय इस शो को होस्ट करते हैं। सोमवार से शुक्रवार तक प्रसारित होने वाले ‘हस्तक्षेप’ कार्यक्रम में न सिर्फ सरकार की नीतियों पर सार्थक चर्चा की जाती है, बल्कि जन सरोकार से जुड़े और जनता को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर भी गंभीर बहस होती है। 

हस्तक्षेप समय की धारा के साथ चलने का नाम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसमे विषयों की सार्थकता और उनका बेहद सहज प्रस्तुतीकरण समाहित होता है। न किसी के साथ, न किसी के खिलाफ। हरदम सत्य के साथ और अनीति के खिलाफ।

इस कार्यक्रम में एक खास पैनल होता है जिसमें चुने गए मुद्दों और विषयों से जुड़े एक्सपर्ट अपनी राय रखते हैं। 
इस कार्यक्रम में जिस तरह से निष्पक्ष तरीके से चर्चा और विश्लेषण होता है, वो इसे बाकी के टीवी शो से अलग बनाता है। आज के दौर में दूसरे टीवी चैनलों पर होने वाले डिबेट शो जहां लगातार शोर-शराबे की भेंट चढ़ते जा रहे हैं, तो वहीं ‘हस्तक्षेप’ शो की शालीनता और तर्कपूर्ण बहस इस शो को अन्य टीवी शो से अलग बनाता है। बिना शोर-शराबे, और हंगामे के निष्पक्ष तरीके से खबरों का विश्लेषण ही इस शो की यूएसपी है। 

हस्तक्षेप के जरिए हमने देश और समाज को कई महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया है। जो मुद्दा आपके दिल के बेहद करीब हो, वही मुद्दा हस्तक्षेप की सबसे बड़ी नींव होता है। कोरोना काल में भी इस कार्यक्रम के जरिए, दर्शकों तक इस महामारी के खतरों, इसके इलाज और बचाव के तरीकों की जानकारी योजनाबद्ध तरीकों से पहुंचाने की कोशिश की गई। चाहे प्रवासी मजदूरों के पलायन का मुद्दा हो, राजधानी दिल्ली के अस्पतालों में चल रही धांधली का मुद्दा हो या फिर कोरोना को लेकर गरमाए राजनीतिक मुद्दे हों, हस्तक्षेप में इन सभी मुद्दों को बेहद गंभीरता के साथ उठाया गया। इसका असर ये हुआ कि सरकारों को हरकत में आने को मजबूर होना पड़ा। 
इतना ही नहीं कोरोना संकट के इस दौर में कुछ कार्यक्रम मेडिकल की दुनिया के जाने-माने विशेषज्ञों के जरिए लोगों में संक्रमण से व्याप्त भय को न सिर्फ दूर करने का प्रयास किया गया, बल्कि जीवनरक्षा के वैज्ञानिक तौर-तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। 

हस्तक्षेप न्यूज़ मेकर के जरिए सबसे महत्वपूर्ण खबरों को आपके सामने लाता रहा है। इस दौरान सोशल डिस्टेंशिंग का पालन करते हुए स्काइप और मोजो के जरिए करीब 45 जानी-मानी हस्तियों का इंटरव्यू भी किया गया। इस शो ने जिस तरह बेहद कम समय में दर्शकों के बीच लोकप्रियता की ऊंचाइयों को छुआ है और दर्शकों के बीच एक खास जगह बनाने में कामयाब हुआ है, वो सच्चे मायने में एक बड़ी उपलब्धि है। हस्तक्षेप इसलिए भी दूसरों से अलग और विशिष्ट है क्योंकि हम सिर्फ सरोकारों की बात ही नही करते बल्कि उसे जीकर भी दिखाते हैं। ये हस्तक्षेप राष्ट्र के नाम है। राष्ट्र के लिए है।

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