सिर्फ 12वीं पास को शिक्षा मंत्री बनाने से लेकर जिन्ना से तुलना तक, जानिए क्यों एक समर्थक बन गई सबसे कड़ी आलोचक
नई दिल्ली: जब देश महंगाई और वैश्विक संकटों से जूझ रहा है, तब राजनीति के रंग एक बार फिर से बदलते नजर आ रहे हैं। पहले सुब्रह्मण्यम स्वामी और अब वरिष्ठ लेखिका और एक्टिविस्ट मधु किश्वर ने मोदी सरकार पर ऐसे तीखे और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं कि सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। ‘दी लेंस’ यूट्यूब चैनल को दिए एक लंबे इंटरव्यू में मधु किश्वर ने न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला, बल्कि बीजेपी के कई बड़े नेताओं, मंत्रियों और पार्टी की कार्यशैली को भी निशाने पर लिया।
यह इंटरव्यू महज एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक ऐसी यात्रा का किस्सा है, जो मोदी के समर्थन से शुरू होकर उनके ‘मोहभंग’ पर खत्म होती है। आइए जानते हैं उस पूरी बातचीत के अहम पहलू…
’12वीं पास’ को शिक्षा मंत्री बनाने पर क्या बोलीं मधु?

अपनी सबसे तीखी आलोचना मधु किश्वर ने 2014 के पहले मोदी कैबिनेट पर की। उन्होंने कहा, “जब मोदी जी का पहला कैबिनेट बना, तो साफ था कि ये तो रबर स्टैंप्स (मात्र मुहर लगाने वाले) हैं।” उन्होंने दो नाम विशेष रूप से लिए – अरुण जेटली और स्मृति ईरानी।
उन्होंने कहा, “अरुण जेटली को वित्त मंत्री बनाया गया, वो भी अमृतसर से चुनाव हारकर आए थे। लेकिन मुझे सबसे ज्यादा धक्का स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने से लगा। उनकी ही पार्टी की महिला नेताओं ने मुझे बताया कि वे केवल 12वीं पास हैं। आप देश को ‘विश्व गुरु’ बनाने की बात कर रहे हैं और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय में एक ऐसे व्यक्ति को बैठा देते हैं जो सास-बहू सीरियल की हीरोइन रही हैं? यह हमारे मुंह पर थूकने जैसा है।”
‘मैंने विल में सारी प्रॉपर्टी मुक्तेश्वर आनंद के नाम कर दी’

हाल ही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर सरकार की कार्रवाई के बीच मधु किश्वर ने खुलकर उनका समर्थन किया। यहां तक कि उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा, “मैं आपको बता दूं, यह शेखी बघारने की बात नहीं है, लेकिन मैंने अपनी विल में सारी प्रॉपर्टी उनके (शंकराचार्य) नाम कर दी है। मैं उनके साथ हर कीमत पर हूं।”
उन्होंने बताया कि वह 2009 से ही शंकराचार्य के साथ गंगा-हिमालय बचाओ आंदोलन में काम कर चुकी हैं और उनके कामकाज के तरीके को बहुत सराहनीय बताया।
‘मोदी जी जिन्ना से भी ज्यादा खतरनाक’
इंटरव्यू में सबसे विवादास्पद बयान यह था जब मधु किश्वर ने पीएम मोदी की तुलना जिन्ना से की। उन्होंने कहा, “मुझे पता चल गया था कि ये (नरेंद्र मोदी) इस्लाम परस्त हैं, इस्लाम के गुलाम हैं, जितने नेहरू भी नहीं थे। और ये हिंदू समाज के लिए जिन्ना से ज्यादा खतरनाक हैं।” उन्होंने अपनी किताब ‘मोदी, मुस्लिम्स एंड मीडिया’ का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की थी कि मोदी मुसलमानों के बहुत ‘खिदमतगार’ हैं, लेकिन मीडिया और राजनीतिक दलों ने उन्हें हिंदू विरोधी करार दिया।
‘बीजेपी के लोग भी हैं खुश, मोदी जाते ही बटेंगी मिठाइयाँ’
एक सवाल के जवाब में मधु किश्वर ने दावा किया कि बीजेपी के अंदर भी कई लोग मोदी जी के तरीके से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा, “क्या प्रतिक्रिया होगी? सब खुश हैं! पक्की बात है। मैं लिख चुकी हूं कि जिस दिन मोदी जी गए, बीजेपी में मिठाइयां बंटेंगी। ये आतंक के माध्यम से सरकार चलाते हैं, किसी को सांस लेने का हक नहीं है।”
‘विदेशी फंडिंग वाली एनजीओ पर नहीं हुई कार्रवाई’
मधु किश्वर ने सरकार पर विदेशी फंडिंग वाली एनजीओ (एनजीओ) को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि उन्होंने मोदी जी को एक याचिका दी थी कि विदेशी फंडिंग वाली एनजीओ पर रोक लगाई जाए, लेकिन इसके उलट मोदी सरकार ने एफसीआरए (FOREIGN CONTRIBUTION REGULATION ACT) कानून में संशोधन कर दिया। उनका आरोप था, “अब राजनीतिक दल विदेशी फंड ले सकते हैं। सरकार ने उन एनजीओ को और इम्यूनिटी दे दी, जो हिंदू समाज को तार-तार कर रही हैं। सोरोस और फोर्ड फाउंडेशन के फंड से चलने वाली एनजीओ को मोदी सरकार ने बचा रखा है।”
‘किताब छपवाने तक नहीं दिया’
मधु किश्वर ने अपने संघर्ष की कहानी भी सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी किताब ‘मोदी, मुस्लिम्स एंड मीडिया’ को छापने से लेकर उसे बेचने तक हर जगह रोड़े अटकाए गए। उन्होंने कहा, “ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस जैसे प्रकाशकों ने मेरी किताबें छापी हैं, लेकिन यह किताब छूने को कोई तैयार नहीं था। मुझे अपनी जेब से पैसा लगाकर छापनी पड़ी। जब मैंने पीएम से पूछा कि क्या आपको कॉपियां चाहिए, तो उन्होंने कहा- नहीं। लेकिन बाद में पता चला कि उन्होंने ‘मोदीनामा’ सीरीज की स्पायरल बाइंडिंग कराकर सभी विदेशी दूतावासों में भेजी थी ताकि यह संदेश जाए कि वे मुस्लिम विरोधी नहीं हैं।”
‘मुझे लेफ्टिस्ट कहते थे, पर मैं कभी लेफ्टिस्ट नहीं थी’
आरएसएस और संघ परिवार से जुड़े होने के सवाल पर मधु किश्वर ने साफ किया, “मुझे लेफ्टिस्ट कहते थे, मैं कभी लेफ्टिस्ट नहीं थी। मैं फेमिनिस्ट भी नहीं हूं। मैं न तो लेफ्ट हूं, न राइट। मैं तथ्यों के आधार पर बात करती हूं।” उन्होंने कहा कि उनकी पहचान हमेशा एक फैक्टुअल एक्टिविस्ट की रही है।
निष्कर्ष
मधु किश्वर का यह इंटरव्यू सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि उन सवालों को उठाता है जो लंबे समय से चुप हैं। चाहे वह शिक्षा मंत्री की योग्यता का मामला हो, विदेशी फंडिंग की राजनीति हो, या फिर संतों पर सरकार की कार्रवाई – मधु किश्वर ने अपनी बेबाक राय से एक बार फिर साबित कर दिया कि वह किसी भी विचारधारा की परवाह किए बिना अपनी बात रखने में यकीन रखती हैं। यह इंटरव्यू आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का अहम मुद्दा बना रहेगा।

