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भारत के मैन्डोलिन म्यूजिक के जादूगर किशोर देसाई के साथ एक साक्षात्कार 

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता किशोर देसाई का जन्म 1937 में हुआ था और वो पिछले 50 वर्षों से भारतीय फिल्म उद्योग में मैन्डोलिन और सरोद बजा रहे हैं।

मुझे नहीं लगता कि कोई भी भारतीय नागरिक 'ऐ मेरे वतन के लोगो जरा आंख में भरलो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी' गाना कभी भूल सकता है।(स्वर्गीय)श्री लता मंगेशकर जी का गया हुआ यह गाना जब भी सुनो रोंगटे खड़े कर देता हैं| इस गाने को सदाबहार बनाने का श्रेय सिर्फ इसके बोल नहीं बल्कि बैकग्राउंड में बज रहे मैन्डोलिन म्यूजिक की आवाज़ भी हैं| येह मैन्डोलिन बजाने वाले किशोर देसाई थे, उनकी इस मैन्डोलिन ध्वनि ने इस गाने को अमर कर दिया| 

अगर आपको गोल्डन एरा का कोई भी हिट गाना याद हो तो उसे दोबारा सुनिए, जिस भी गाने में आपको मैन्डोलिन या फिर सरोद के म्यूजिक की आवाज़ सुनाये दे तो समझ जाये की वह किशोर देसाई ने बजाया हैं | फिल्म आन मिलो सजना का गाना 'अच्छा तो हम चलते हैं, फिर कब मिलोगे' या राजकपूर जी का प्रसिद्ध गाना 'आवारा हूं या गर्दिश में हो आसमान का तारा हूं', या फिर बॉर्डर फिल्म का मशहूर गाना 'संदेशे आते हैं संदेश जाते हैं'। लेकिन अब जब भी आप इनमें से किसी भी ट्रैक को सुनें तो एक बार के लिए अपनी आँखों को बंद करके बैकग्राउंड में बज रहे मैन्डोलिन या सरोद की आवाज़ को सुनयेगा| में यकीन से कह सकता हूँ की कुछ पल के लिए आप एक अलग ही दुनिया में पहुंच जायेंगे | 

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता किशोर देसाई का जन्म 1937 में हुआ था और वे पिछले 50 वर्षों से भारतीय फिल्म उद्योग में मंडोलिन और सरोद बजा रहे हैं। गोल्डन एरा के सभी हिट गाने जहां मैन्डोलिन या सरोद का इस्तेमाल किया जा रहा है, किशोर जी द्वारा ही बजाए गए हैं | 

फिल्म मेरे जीवन साथी का 'ए मेरे दिल के चैन' हो या बलराज साहनी जी का 'ऐ मेरे जोहरा जबीन', संख्याएं अनंत हैं। ५० सालो से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में म्यूजिक देने वाले किशोर जी की  कुछ खट्टी मीठी यादों को आज हम ताज़ा कर रहे हैं | जीवन से जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प कहानियां उन्हीं की जुबानी। रेबा अयाज (डिगपू न्यूज) के अनुरोध पर, जो उनका इंटरव्यू ले रहे थे, उन्होंने अपने मेन्डोलिन पर कुछ गाने बजाए।

पूरा इंटरव्यू देखने के लिए यूट्यूब के निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे 


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