दुनिया के सबसे विवादित व्यक्तियों में से एक Jeffrey Epstein से जुड़ी नई फाइल्स ने कई देशों की राजनीति और बिजनेस नेटवर्क को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
एपस्टीन फाइल्स में भारतीय कनेक्शन भी सामने आए हैं। वह भारतीय बिजनेसमैन Anil Ambani, फिर Hardeep Singh Puri औरप्रधानमंत्री Narendra Modi से अच्छी तरह जुड़ा हुआ बताया जाता है।
एपस्टीन फाइल्स के मेल एक्सचेंज यह संकेत देते हैं कि अनिल अंबानी और हरदीप पुरी, नरेंद्र मोदी की ओर से Jeffrey Epstein से संपर्क में थे।
नरेंद्र मोदी को जेफ्री एपस्टीन से क्या चाहिए था?
अनिल अंबानी क्यों?
क्या अनिल अंबानी भारत की आर्म्स लॉबी का चेहरा हैं? यह बहुत बड़ा सवाल है।
यही वह शख्स हैं जिनकी कंपनी Reliance Defence Limited ₹59,000 करोड़ के Dassault Rafale फाइटर जेट डील में कूद पड़ी। यह कंपनी इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट से सिर्फ 13 दिन पहले ही बनाई गई थी।। इसके पास डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का कोई पुराना अनुभव भी नहीं था।
बाद में Comptroller and Auditor General of India ने कीमतों की अस्पष्टता पर सवाल उठाए। विपक्ष के अनुसार यह ₹1.3 लाख करोड़ का घोटाला था।
कई याचिकाएं दायर हुईं। भारत के Supreme Court of India ने सभी आरोप खारिज कर दिए। उस समय CJI Ranjan Gogoi थे।
बाद में रंजन गोगोई को राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। उनकी इस नियुक्ति को लेकर उस समय काफी राजनीतिक बहस भी हुई।

एपस्टीन फाइल्स में अनिल अंबानी के बारे में क्या सामने आया
नई जारी हुई जेफ्री एपस्टीन फाइल्स (Epstein Files Transparency Act के बाद) में अनिल अंबानी का नाम 87 से 97 बार सामने आया है।
ये 2017 से 2019 तक के टेक्स्ट मैसेज, iMessage और ईमेल हैं — यानी ठीक एपस्टीन की गिरफ्तारी से पहले तक।
इन चैट्स में मुख्य रूप से तीन तरह की बातें सामने आईं:
बिजनेस और डिफेंस फाइनेंस
अंबानी ने 20 अप्रैल 2019 को पूछा था, “कॉर्पोरेट लेवल पर फाइनेंसिंग कैसे अरेंज की जा सकती है?” और “इंडिया के डील्स” पर भी चर्चा हुई।
पॉलिटिक्स
नरेंद्र मोदी, Donald Trump की टीम (जैसे Jared Kushner और Steve Bannon), इज़राइल की रणनीति और अमेरिका का अगला भारत राजदूत कौन होगा – इन सब पर बातचीत हुई।
सोशल मीटिंग्स
एपस्टीन लगातार अंबानी को अपने न्यूयॉर्क स्थित घर, पेरिस की पार्टियों और अपने निजी कैरेबियन द्वीप पर आने का निमंत्रण दे रहा था। अंबानी एक बार न्यूयॉर्क स्थित घर गए और कुछ डिनर भी होस्ट किए।
“डेजर्ट” वाली चैट
इन चैट्स में “डेजर्ट” शब्द भी कई बार इस्तेमाल हुआ। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह युवा महिलाओं के लिए कोड वर्ड हो सकता है।
2017 में अमेरिकी राजदूत के बारे में चर्चा करते हुए अंबानी ने कहा कि भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार “बहुत कमजोर” है। इस पर एपस्टीन ने जवाब दिया, “एक लंबी स्वीडिश गोरी महिला ले आऊं, विजिट करने में मजा आएगा?” अंबानी ने लिखा, “अरेंज कर दो।”
हालांकि इसे कुछ लोगों ने डिप्लोमैटिक या सामाजिक संदर्भ में हुई बातचीत भी बताया है।
अन्य संदेशों में भी “डेजर्ट” शब्द का जिक्र हुआ। उदाहरण के लिए, एपस्टीन ने अंबानी से कहा कि इजराइली पूर्व प्रधानमंत्री Ehud Barak से मिलते समय “डेजर्ट” ले लेना।
एक अन्य संदेश में अंबानी ने पूछा, “22 तारीख को पेरिस में डेजर्ट के लिए क्या है?”
क्या अंबानी एपस्टीन के आइलैंड गए थे?
उपलब्ध दस्तावेज़ों में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि अनिल अंबानी कभी एपस्टीन के निजी द्वीप पर गए हों या किसी यौन अपराध में शामिल रहे हों।
फाइल्स मुख्य रूप से बिजनेस और राजनीतिक नेटवर्किंग के साथ-साथ इन विवादित चैट्स की ओर इशारा करती हैं।
एपस्टीन फाइल्स में ऐसा कोई सबूत नहीं है कि Anil Ambani कभी Jeffrey Epstein के आइलैंड पर गए हों या किसी यौन गतिविधि में शामिल रहे हों। उनके खिलाफ कोई आपराधिक आरोप भी दर्ज नहीं है। फाइल्स में मुख्य रूप से बिजनेस और राजनीतिक नेटवर्किंग के साथ-साथ यह विवादित “डेजर्ट” वाली बातचीत दिखाई देती है। कुछ मीडिया संस्थानों को “लंबी स्वीडिश गोरी” वाली लाइन को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए आलोचना का सामना भी करना पड़ा।
अन्य भारतीय जैसे हरदीप सिंह पुरी का नाम भी आया है, लेकिन अनिल अंबानी की चैट सबसे लंबी और सबसे डिटेल वाली हैं।
अगर हम हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री के मेल एक्सचेंज में गोता लगाएं तो समझ आता है कि हरदीप पहले से जेफ्री एपस्टीन से जुड़ा था और फिर उसने अनिल अंबानी को इंट्रोड्यूस किया और शायद नरेंद्र मोदी को भी। या नरेंद्र मोदी ने हरदीप पुरी को इजराइल और अमेरिका से निजी संबंध बनाने के लिए हायर किया और हरदीप को जेफ्री एपस्टीन सही आदमी लगा। हम अभी नहीं जानते।
लेकिन नरेंद्र मोदी को जेफ्री एपस्टीन जैसे व्यक्ति की जरूरत क्यों पड़ी? या जेफ्री को अनिल अंबानी से मिलने में क्यों दिलचस्पी थी? अनिल अंबानी क्यों? मुझे गहरा यकीन है कि यह सेक्स अफेयर्स के बारे में नहीं था। यह उससे कहीं बड़ा था। वह क्या था?
हरदीप सिंह पुरी को जared कुश्नर और स्टीव बैनन से जुड़ने के लिए जेफ्री एपस्टीन जैसे व्यक्ति की मदद क्यों चाहिए थी?
और अब फिर से अनिल अंबानी को देखिए – जिसका नाम इन फाइल्स में हर जगह है। वही अनिल अंबानी जिसका ग्रुप अब नए-नए केसों में डूब रहा है:
अनिल अंबानी के हाल के मुसीबतें (2021–2026)
पिछले पांच साल में अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों पर बहुत गंभीर आरोप लगे हैं। मुख्य आरोप यह है कि 2013-2017 के बीच उन्होंने बैंकों से भारी कर्ज लिया, लेकिन उस पैसे का दुरुपयोग और डायवर्शन कर दिया। पूरा ग्रुप कर्ज में डूबा हुआ है – दिवालिया मामलों में लगभग ₹1.5 लाख करोड़ पहले ही लिख दिया जा चुका है।
यह हुआ है:
- अक्टूबर 2025 में Cobrapost वेबसाइट ने ₹41,900 करोड़ के भारी घोटाले का आरोप लगाया। कहा कि 2006 से बैंक लोन, IPO और बॉन्ड के पैसे हड़प लिए गए। अंबानी टीम ने इसे “दुश्मनों का गंदा प्लान” बताया जो शेयर प्राइस गिराने और BSES, मुंबई प्रॉपर्टी हड़पने के लिए किया गया।
CBI ने कई आपराधिक केस दर्ज किए हैं – धोखाधड़ी, साजिश और फंड डायवर्शन के:
- 2025: SBI की शिकायत के बाद पहला बड़ा केस – ₹2,929 करोड़ घोटाला।
- फरवरी 2026: बैंक ऑफ बड़ौदा शिकायत – ₹2,220 करोड़ घोटाला। CBI ने अंबानी के घर और ऑफिस पर छापा मारा। आरोप है कि अकाउंट्स फर्जी बनाए और फर्जी कंपनियों के जरिए पैसे भेजे।
- मार्च 2026 (ताजा केस): PNB बैंक ने नया केस दर्ज किया – ₹1,085 करोड़ घोटाला (PNB से ₹621 करोड़ + पुराने यूनाइटेड बैंक से ₹464 करोड़)। फिर धोखाधड़ी और क्रेडिट लिमिट का दुरुपयोग।
ED (इनफोर्समेंट डायरेक्टरेट) मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है:
- नवंबर 2025 से: 40 से ज्यादा प्रॉपर्टी जब्त कीं, कुल ₹3,084 करोड़ की, जिसमें पाली हिल (बांद्रा) का बड़ा घर और दिल्ली का Reliance Centre शामिल।
- कई छापे और लंबी पूछताछ (एक 9 घंटे से ज्यादा चली)। बेटा जय अनमोल अंबानी भी अलग केस में नामजद।
- सुप्रीम कोर्ट ने SIT बनाने का आदेश दिया क्योंकि एजेंसियां बहुत धीमी चल रही थीं।
कोर्ट नजर रखे हुए हैं:
- सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED को देरी के लिए फटकार लगाई और नियमित रिपोर्ट मांगी।
- बॉम्बे हाईकोर्ट ने केस आगे बढ़ने दिए।
- अनिल अंबानी ने कोर्ट को लिखित वादा दिया कि वह भारत नहीं छोड़ेंगे।
अभी तक किसी भी केस में दोषसिद्धि नहीं हुई। अनिल अंबानी और उनका ग्रुप लगातार कह रहा है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया और कुछ खबरें प्रतिद्वंद्वियों द्वारा फैलाई गई फेक न्यूज हैं।
हरदीप सिंह पुरी: IFS अधिकारी से मोदी कैबिनेट मंत्री बनने तक

एपस्टीन फाइल्स में Hardeep Singh Puri का नाम सामने आने के बाद एक और महत्वपूर्ण सवाल उठता है—आखिर एक पूर्व IFS अधिकारीइतनी तेजी से भारतीय राजनीति के शीर्ष स्तर तक कैसे पहुँच गए?
हरदीप सिंह पुरी भारतीय विदेश सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। उन्होंने कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि भी रहे।
राजनयिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और बाद में Bharatiya Janata Party से जुड़े।
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि 2017 का साल इस पूरी कहानी में एक अहम कड़ी के रूप में सामने आता है।
इसी समय की कुछ ईमेल और संचार में Jeffrey Epstein के साथ उनके संपर्क का उल्लेख सामने आया है। इसी वर्ष भारतीय उद्योगपति Anil Ambani के साथ भी एपस्टीन की बातचीत तेज़ होती दिखाई देती है।
और ठीक इसी समय — 2017 में ही — हरदीप सिंह पुरी को Rajya Sabha के लिए नामित किया गया और उन्हें प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार में मंत्री बनाया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पुरी का अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक अनुभव और वैश्विक संपर्क उन्हें सरकार के लिए उपयोगी बनाते थे। लेकिन आलोचक यह भी सवाल उठाते हैं कि क्या उनके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क — जिनमें पश्चिमी राजनीतिक और कारोबारी हलकों से संबंध शामिल थे — ने उनके राजनीतिक उभार में कोई भूमिका निभाई।
हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक निष्कर्ष या आरोप साबित नहीं हुए हैं। लेकिन टाइमलाइन यह जरूर दिखाती है कि 2017 में एपस्टीन नेटवर्क से जुड़े संपर्क और भारतीय राजनीति में पुरी का उभार लगभग एक ही समय पर दिखाई देते हैं।
यही वजह है कि एपस्टीन फाइल्स सामने आने के बाद अब कई विश्लेषक इस कड़ी को नए सिरे से देखने की बात कर रहे हैं।

