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क्या जय श्री राम शब्द बुनियादी मुद्दों रोटी ,कपड़ा से हार गया , पश्चिम बंगाल से ममता बैनर्जी की वापसी

क्या जय श्री राम शब्द ही चुनाव घोषणा पत्र हैं – आख़िर जनता ने अब क्यों नकार दिया  : मंथन करें

पश्चिम बंगाल चुनाव में टी एम् सी 292 सीटों में से 209 पर बढ़त हासिल कर सरकार बनानें जा रही हैं जबकि लम्बे समय से पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने के लियें भाजपा पुरजोर कोशिश के बाद भी 81 सीटो पर सिमटी नज़र आ रही हैं जबकि अन्य की 1 – 1 सीटो पर कब्ज़ा कर पाई हैं |

भाजपा या कहें संघ का एक ही नारा रहा हैं 1992 से आज तक जय श्री राम  , मंदिर वही बनायेगें और इसके साथ ही भारत की जनता को क्या मिला – धार्मिक उन्माद जो पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिला हैं

1992 में मीडिया में एक पोस्टर बॉय सामने आया था नाम था अशोक मोची पेशे से मोची हैं लेकिन आज कल वह भाई – चारे और कौमी एकता की बातें करते नज़र आ रहें हैं अभी वह किसानों के समर्थन में शाहजहांपुर बॉर्डर राजस्थान में देखे गयें थें मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा देश मे प्रेम भाई चारा देश में होना चाहिये आज कल वह मुस्लिम बिरादरी के यहां आना जाना करते हैं यह बड़ी बात हैं जो एक आम जनता को इतने बडे नरसंहार के बाद यह समझ बनी की यह देश राम रहीम कबीर रविदास का हैं यह विभिन्नताओं में एकता का देश हैं |

भारत देश एक धर्म निरपेक्ष देश हैं यहाँ सभी नागरिकों को अपने धर्म को मानने , आस्था रखने प्रकट करने और प्रचार प्रसार करने का अधिकार हैं  इसके साथ ही आप मज्जिद भी जा सकते हो मंदिर भी और गुरुद्वारा भी आप को कोई भी रोकने टोकने वाला नहीं मिलेगा  यह भारत देश की खूबसूरती हैं |

किसी देश में चुनाव क्यों होते हैं – एक नज़र

किसी भी देश के सतत विकास के लियें और उस देश के नागरिकों के हक्क अधिकार के लियें लोकतांत्रिक व्यवस्था या गणतांत्रिक व्यवस्था के तहत कुछ लोग नीति निर्माता या कहें अप्रत्यक्ष रूप से शाषक वर्ग होता हैं जो वहां की स्थानीय जनता के लियें नीति बनाते हैं  लेकिन विश्व स्तर पर बड़ी क्रांति हुई और अधिक्तर देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम हुई – जिसे लोकतंत्र कहा गया हैं |

मार्टीन लूथर ने इस पर कहा था जनता का जनता के लियें जनता का शासन ही लोकतंत्र हैं 

खैर आज का लोकतंत्र – भारत में प्रथम चुनाव 1952 में सम्पन्न हुयें कहा जाता हैं उस वक्त के नेताओं ने जनता के सामने भविष्य का भारत कैसा हो इस पर फोकस रखा इसके साथ ही प्रत्येक व्यक्ति को रोटी कपड़ा और मकान रोजगार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी और साथ ही पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से देश के विकास में मुख्य भूमिका निभाई और 1952 के घोषणा पत्र और आज की पार्टियों के घोषणा पत्र पर आप नज़र डालें तो आप को एक बड़ा परिवर्तन नज़र आयेंगा जिस के जिम्मेदार हम हैं और यह सत्य हैं

भाजपा की विभाजनकारी नीति –

भाजपा के राम और हमारें मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम में आज अंतर इन सत्ता धारी पार्टियो ने बड़ा कर दिया हैं , रामानन्द सागर की रामायण को हम टीवी पर देखते बड़ें हुयें हमनें महसूस किया भगवान राम करुणा प्रेम सौहार्द और मित्रता और अपनी जनता के प्रिय और ह्रदय में विराजित होने वाले थे सदैव जनता के हित में ही सोचा और वचनों से बंदे रहें लेकिन आज और 1992 के बाद से हमारें सबसे के प्रिय श्री राम पर राजनीति एक विशेष पार्टी लोगों ने अपना आधिपत्य जमा लिया और जो सब के प्रिय आदर्श श्रीराम हैं उसका बंटवारा कर दिया जो कि शर्मनाक हैं

अयोध्या में मुस्लिम महिलाओं ने सामूहिक रूप से श्री राम की नियमित पूजा करती हैं

नाजनीन अंसारी अयोध्या से हैं भगवान श्री राम को अपना आदर्श मानती हैं यह हम सब के लियें गर्व की बात हैं और यह हक भारत का संविधान सभी को देता हैं कि वह किसी भी भगवान अल्लाह जीसस , वाहिगुरू पर आस्था रख सकता हैं ऒर चाहें तो वह नास्तिक भी रह सकता हैं |

पश्चिम बंगाल क्यों ख़ास हैं – पश्चिम बंगाल में भाजपा और अमित शाह ने अपना पूरा दम – ख़म लगाया लेकिन वह सरकार बनाने वाला जादुई आकड़े को छु नहीं सके लेकिन भाजपा की हिन्दुत्त्व वाली सोच और हिंसा ने ही पश्चिम बंगाल में चुनावों को अलग मोड़ दे दिया जिसका नुकसान भाजपा दहाई के आकड़ें पर ही सिमट गई |

ममता बैनर्जी के साहस और नेतृत्व को आज पूरी दुनिया  सलाम कर रही हैं उनकी जीत का जश्न तो हैं ही साथ ही उनकी पार्टी टी एम् सी के स्टार प्रचारक भी वह खुद थी जबकि सामने केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मोदी , अमित शाह , स्मरति ईरानी , मिथुन चक्रवती सहित बहुत से स्टार प्रचारक वोटरों को साधने में लगें इसके साथ बंगाल में जो हिंसा देखने को मिल रही थी वह साफ़ अंदाजा थी की यह लोकत्रांतिक व्यवस्था के विपरीत हैं इसके साथ ही केंद्र की संस्थाओं जैसे – ईडी , सी बी आई , द्वारा जो गैर संवेधानिक रूप से कार्यवाही की गई वह भी गलत थी उमीद करते हैं भाजपा विपक्ष में बुनियादी मुद्दों के लियें सदन में संघर्ष करेगी |

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